भारत की कार्बन क्रेडिट योजना को ब्रिटेन की मान्यता, निर्यातकों पर घट सकता है CBAM का बोझ
भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) को ब्रिटेन द्वारा मान्यता दिया जाना भारतीय उद्योग और निर्यात क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है। इस मान्यता के बाद ब्रिटेन के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के तहत आने वाले भारतीय उत्पादों को कार्बन मूल्य निर्धारण में राहत मिलने की संभावना बढ़ गई है।
भारत की CCTS को ब्रिटेन की उस सूची में शामिल किया गया है, जिसमें विदेशी कार्बन मूल्य निर्धारण व्यवस्थाओं को मान्यता दी जाती है। इसका अर्थ यह है कि यदि किसी भारतीय उत्पाद पर भारत में प्रभावी कार्बन मूल्य पहले ही लागू हो चुका है, तो ब्रिटेन में आयात के समय उस लागत को समायोजित किया जा सकता है। इससे एक ही उत्सर्जन पर दोहरी कार्बन लागत लगने की आशंका कम होगी।
क्या है भारत की CCTS योजना
भारत सरकार ने कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाने, उत्सर्जन हटाने या उससे बचने के उद्देश्य से अधिसूचित किया है। इस व्यवस्था के तहत निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने वाली संस्थाओं को कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्र प्राप्त हो सकते हैं, जिनका व्यापार किया जा सकता है।
इस प्रणाली के संचालन में ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) की महत्वपूर्ण भूमिका है। योजना का उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था में कार्बन उत्सर्जन की वास्तविक लागत को धीरे-धीरे शामिल करते हुए उद्योगों को अधिक ऊर्जा-कुशल और कम-कार्बन उत्पादन व्यवस्था की ओर बढ़ाना है।
ब्रिटेन की मान्यता से भारतीय निर्यातकों को फायदा
ब्रिटेन के CBAM के दायरे में आने वाले भारतीय उत्पादों के लिए यह मान्यता विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। संबंधित उत्पादों के आयातक भारत में वहन किए गए प्रभावी कार्बन मूल्य के अनुरूप राहत का दावा कर सकेंगे, बशर्ते वे ब्रिटिश नियमों के तहत आवश्यक साक्ष्य और सत्यापन संबंधी शर्तों को पूरा करें।
इस व्यवस्था का सीधा लाभ भारतीय निर्यातकों को मिल सकता है, क्योंकि ब्रिटेन में देय प्रभावी CBAM लागत कम हो सकती है। इससे भारतीय उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने में सहायता मिलेगी।
दोहरी कार्बन लागत से बचाव का सिद्धांत
ब्रिटिश व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन उत्पादों पर उनके मूल देश में पहले से कार्बन मूल्य लगाया जा चुका है, उन पर आयात के समय अनावश्यक रूप से दोहरा कर भार न पड़े।
