‘विजिट माय स्टेट’ अभियान से युवाओं को मिलेगा अपने शहर की कहानी कहने का मंच, जेन-Z बनेगी सांस्कृतिक एम्बेसडर

उत्तर प्रदेश में पर्यटन को नई पीढ़ी की नजर से प्रस्तुत करने के लिए ‘विजिट माय स्टेट’ अभियान की शुरुआत की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को अपने शहर, स्थानीय संस्कृति, विरासत, खानपान और कम-ज्ञात पर्यटन स्थलों की कहानी स्वयं दुनिया तक पहुंचाने का अवसर देना है। अभियान में विशेष रूप से जेन-Z को सांस्कृतिक एम्बेसडर के रूप में जोड़ा जाएगा।

 

इस पहल के तहत युवाओं से लगभग 60 सेकंड की छोटी वीडियो रील तैयार करने के लिए कहा जाएगा, जिसमें वे अपने शहर की खासियत, स्थानीय अनुभव, अनसुनी कहानियां, पारंपरिक भोजन, ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक पहचान को अपने अंदाज में प्रस्तुत कर सकेंगे।
पर्यटन प्रचार का बदला तरीका

 

परंपरागत पर्यटन प्रचार में आमतौर पर आधिकारिक तस्वीरें, ब्रोशर और तयशुदा संदेश प्रमुख भूमिका निभाते हैं। ‘विजिट माय स्टेट’ अभियान इस मॉडल से अलग दिशा में आगे बढ़ रहा है। यहां स्थानीय युवाओं को स्वयं कथावाचक बनाया जाएगा।
इसका उद्देश्य किसी शहर की पहचान केवल उसकी प्रसिद्ध इमारतों या पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं रखना, बल्कि वहां के लोगों, अनुभवों, स्थानीय स्वाद, बाजारों, गलियों और सांस्कृतिक जीवन के जरिए उसकी वास्तविक कहानी प्रस्तुत करना है।

 

स्थानीय युवाओं की आवाज बनेगी अभियान की ताकत
स्थानीय निवासी अपने शहर को बाहरी पर्यटक की तुलना में अधिक गहराई से जानते हैं। वे उन जगहों, परंपराओं और अनुभवों से परिचित होते हैं, जो अक्सर सामान्य पर्यटन गाइड में दिखाई नहीं देते।यही वजह है कि इस अभियान में युवाओं से कहा जा रहा है कि वे कैमरे के सामने आकर अपने शहर की विशिष्टता को अपनी भाषा और शैली में साझा करें। इससे पर्यटन प्रचार अधिक स्वाभाविक, विश्वसनीय और मानवीय रूप ले सकता है।

 

छिपे पर्यटन स्थलों को मिल सकती है नई पहचान
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा होने वाली छोटी वीडियो सामग्री केवल पहले से प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को बढ़ावा नहीं देगी, बल्कि कम-ज्ञात स्थानों को भी बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाने में मदद कर सकती है।
ऐसे कई छोटे शहर, स्थानीय स्मारक, धार्मिक स्थल, पारंपरिक बाजार, हस्तशिल्प केंद्र और प्राकृतिक स्थान हैं, जिनके बारे में व्यापक स्तर पर जानकारी कम है। युवाओं द्वारा तैयार की गई रील्स इनके लिए डिजिटल पहचान का नया माध्यम बन सकती हैं।

 

स्थानीय भोजन और संस्कृति भी बनेगी आकर्षण
अभियान में स्थानीय खानपान को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। किसी शहर की पहचान केवल उसके स्मारकों से नहीं, बल्कि वहां के भोजन, भाषा, पहनावे, उत्सव और स्थानीय जीवनशैली से भी बनती है।
इसलिए युवा अपने शहर के विशिष्ट व्यंजन, पारंपरिक मिठाइयां, स्थानीय बाजार और सांस्कृतिक परंपराओं को भी वीडियो के माध्यम से प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे पर्यटन को अधिक अनुभव-आधारित रूप मिल सकता है।

 

जेन-Z की डिजिटल समझ का उपयोग
नई पीढ़ी विशेष रूप से रील्स, शॉर्ट वीडियो और सोशल मीडिया आधारित कंटेंट से जुड़ी है। जेन-Z के पास डिजिटल कहानी कहने, दृश्य प्रस्तुति और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को समझने की सहज क्षमता है।
पर्यटन विभाग इसी डिजिटल व्यवहार को पर्यटन प्रचार की ताकत में बदलना चाहता है। इससे आधिकारिक प्रचार सामग्री की तुलना में अधिक ऑर्गेनिक और व्यापक पहुंच हासिल की जा सकती है।

 

यात्रा योजना बनाने का तरीका भी बदल रहा है
युवा यात्रियों में यात्रा की योजना बनाने से पहले छोटी वीडियो सामग्री, वास्तविक अनुभव और कंटेंट क्रिएटर्स की राय देखने का चलन तेजी से बढ़ा है। लोग केवल औपचारिक वेबसाइट या विज्ञापन पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि स्थानीय लोगों द्वारा साझा किए गए अनुभवों को भी महत्व देते हैं।
ऐसे में ‘विजिट माय स्टेट’ जैसे अभियान पर्यटन निर्णयों को प्रभावित करने वाले डिजिटल कंटेंट का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकते हैं।

 

स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिल सकता है लाभ
कम-ज्ञात पर्यटन स्थलों को डिजिटल पहचान मिलने से स्थानीय होटल, होमस्टे, रेस्तरां, परिवहन सेवाओं, हस्तशिल्प और छोटे व्यवसायों को भी फायदा हो सकता है।
यदि किसी स्थान की लोकप्रियता सोशल मीडिया के माध्यम से बढ़ती है, तो वहां पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है और इससे स्थानीय रोजगार एवं आय के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

 

पर्यटन में ‘लोगों की कहानी’ को मिली नई जगह
यह पहल पर्यटन के उस नए मॉडल को सामने लाती है, जिसमें किसी स्थान की पहचान केवल सरकार या पर्यटन एजेंसियां तय नहीं करतीं, बल्कि वहां रहने वाले लोग भी उसके ब्रांड एम्बेसडर बनते हैं।
स्थानीय युवाओं को कहानी कहने की जिम्मेदारी देकर अभियान पर्यटन को अधिक सहभागी, डिजिटल और अनुभव-केंद्रित बनाने की कोशिश करता है।