गाजियाबाद नगर निगम में तीन वर्षों का बदलाव: आय, स्वच्छता, डिजिटल सेवाओं और हरित विकास पर बढ़ा फोकस
गाजियाबाद नगर निगम में बीते तीन वर्षों के दौरान प्रशासनिक कार्यशैली, राजस्व वृद्धि, स्वच्छता प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और डिजिटल नागरिक सेवाओं को लेकर कई बदलाव देखने को मिले हैं। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के कार्यकाल में निगम ने बड़े प्रोजेक्टों के साथ-साथ उन छोटी व्यवस्थागत समस्याओं पर भी ध्यान केंद्रित किया, जिनका सीधा असर आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर पड़ता है।
इस अवधि में फील्ड निरीक्षण बढ़ाने, विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय करने, संसाधनों के बेहतर उपयोग और योजनाओं की नियमित निगरानी पर जोर दिया गया। प्रशासनिक व्यवस्था में यह संदेश देने की कोशिश की गई कि विकास केवल बड़ी परियोजनाओं से नहीं, बल्कि सड़कों, सफाई, जल निकासी, सार्वजनिक सुविधाओं और शिकायत निस्तारण जैसी बुनियादी सेवाओं की गुणवत्ता से भी तय होता है।
राजस्व बढ़ाने के लिए संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर
नगर निगम की वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए राजस्व स्रोतों को व्यवस्थित करने और निगम की संपत्तियों के बेहतर उपयोग की दिशा में काम किया गया। संपत्ति कर संग्रह, निगम परिसंपत्तियों से आय और बकाया वसूली जैसे क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई।
नगर निकायों के लिए वित्तीय आत्मनिर्भरता लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। बढ़ती आबादी और तेजी से फैलते शहरी क्षेत्र में सड़क, स्वच्छता, सीवर, जल निकासी, प्रकाश व्यवस्था और पर्यावरणीय परियोजनाओं पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय राजस्व बढ़ाने की रणनीति को महत्वपूर्ण माना गया।
ग्रीन बॉन्ड ने गाजियाबाद को दी नई पहचान
नगर निगम की सबसे चर्चित पहलों में ग्रीन बॉन्ड के माध्यम से पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना शामिल रहा। लगभग 150 करोड़ रुपये के ग्रीन बॉन्ड से जुड़े प्रयास ने शहरी निकायों के लिए वैकल्पिक वित्तपोषण के मॉडल की ओर ध्यान आकर्षित किया।
ग्रीन बॉन्ड के माध्यम से प्राप्त पूंजी का उद्देश्य ऐसी परियोजनाओं में निवेश करना है जिनसे जल संरक्षण, ऊर्जा दक्षता, अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा मिले। नगर निकायों के लिए यह मॉडल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भविष्य में बड़े शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्टों के लिए पूंजी बाजार से संसाधन जुटाना एक प्रमुख विकल्प बन सकता है।
311 ऐप से नागरिक सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने का प्रयास
डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में 311 ऐप को नागरिक शिकायतों और सेवाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया। इसका उद्देश्य लोगों को अलग-अलग कार्यालयों में जाने के बजाय एक डिजिटल माध्यम से शिकायत दर्ज करने और उसकी प्रगति पर नजर रखने की सुविधा देना है।
स्वच्छता, सड़क, स्ट्रीट लाइट, जल निकासी, अतिक्रमण और अन्य नागरिक समस्याओं के समाधान में डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। शिकायत के पंजीकरण से लेकर निस्तारण तक डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से अधिकारियों की कार्यप्रणाली की निगरानी भी आसान होती है।
स्वच्छता को अभियान से आगे व्यवस्था का हिस्सा बनाने पर जोर
नगर निगम प्रशासन ने स्वच्छता व्यवस्था में नियमित निरीक्षण और फील्ड स्तर पर निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया। कूड़ा संग्रह, सार्वजनिक स्थानों की सफाई, डंपिंग प्वाइंट और स्वच्छता कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने की दिशा में विभिन्न प्रयास किए गए।
नगर निगम की कार्यप्रणाली में यह सोच महत्वपूर्ण रही कि स्वच्छता को केवल विशेष अभियान तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे दैनिक नगर प्रबंधन का स्थायी हिस्सा बनाया जाए।
महापौर के साथ समन्वय ने विकास कार्यों को दी गति
नगर निगम प्रशासन और निर्वाचित नेतृत्व के बीच समन्वय को भी विकास की गति से जोड़ा गया। महापौर सुनीता दयाल और निगम प्रशासन के बीच विभिन्न परियोजनाओं, बजट और नागरिक सुविधाओं पर तालमेल बनाए रखने की कोशिश की गई।
शहरी निकायों में विकास कार्य तभी प्रभावी हो पाते हैं जब प्रशासनिक अधिकारी, निर्वाचित प्रतिनिधि और विभागीय टीमें साझा प्राथमिकताओं के आधार पर काम करें। राजनीतिक और प्रशासनिक समन्वय की कमी अक्सर परियोजनाओं में देरी का कारण बनती है, इसलिए संस्थागत तालमेल शहरी शासन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
विभागों के बीच समन्वय और अधिकारियों की जवाबदेही
प्रशासनिक सुधार के तहत विभिन्न विभागों को अलग-अलग इकाइयों के रूप में काम करने के बजाय संयुक्त जिम्मेदारी के साथ काम करने पर जोर दिया गया। निर्माण, स्वास्थ्य, उद्यान, प्रकाश, जलकल और सफाई से जुड़े विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करने की कोशिश की गई।
अधिकारियों से फील्ड में उपस्थित रहने और समस्याओं का समाधान केवल कार्यालयी फाइलों के माध्यम से करने के बजाय मौके पर जाकर स्थिति समझने की अपेक्षा की गई। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन और नागरिक शिकायतों के समाधान में तेजी लाने का प्रयास हुआ।
जलभराव और नालों की सफाई पर विशेष ध्यान
तेजी से बढ़ते शहरों में जलभराव एक बड़ी चुनौती है। गाजियाबाद में भी नालों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था और बारिश के दौरान संवेदनशील स्थानों की पहचान को प्राथमिकता दी गई।
बरसात से पहले नालों की सफाई और बाधाओं को हटाने जैसे कार्यों की निगरानी बढ़ाई गई। इस तरह की तैयारी का उद्देश्य केवल जलभराव कम करना नहीं, बल्कि सड़क क्षति, यातायात अवरोध और नागरिक असुविधा को भी सीमित करना है।
हरियाली और पर्यावरण को शहरी विकास से जोड़ने की कोशिश
शहर में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरणीय संतुलन सुधारने की दिशा में भी विभिन्न अभियान चलाए गए। पौधरोपण, पार्क विकास और शहरी क्षेत्रों में हरित क्षेत्र बढ़ाने को विकास योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया गया।
तेजी से होते निर्माण और शहरीकरण के कारण शहरों में तापमान, वायु प्रदूषण और भूजल जैसी चुनौतियां बढ़ रही हैं। इसलिए नगर निकायों के लिए अब हरित विकास केवल सौंदर्यीकरण का विषय नहीं, बल्कि शहरी जीवन की गुणवत्ता से जुड़ा महत्वपूर्ण पहलू बन चुका है।
सड़क से चौराहे तक व्यवस्थागत सुधार
शहर के प्रमुख मार्गों, चौराहों और सार्वजनिक स्थानों की स्थिति सुधारने पर भी ध्यान दिया गया। यातायात से जुड़े स्थानों पर सौंदर्यीकरण, सड़क सुधार और अव्यवस्थित क्षेत्रों को व्यवस्थित करने जैसे कार्यों को शहरी छवि सुधार से जोड़ा गया।
किसी शहर की पहचान केवल बड़ी परियोजनाओं से नहीं बनती। अच्छी सड़कें, साफ चौराहे, व्यवस्थित स्ट्रीट लाइट और सुरक्षित सार्वजनिक स्थान नागरिक अनुभव को सीधे प्रभावित करते हैं।
विकास की रफ्तार के साथ प्रशासनिक मॉडल पर भी नजर
तीन वर्षों के दौरान गाजियाबाद नगर निगम में दिखाई दिए बदलाव शहरी स्थानीय निकायों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक मॉडल की ओर संकेत करते हैं—फील्ड आधारित निगरानी, वित्तीय अनुशासन, डिजिटल शिकायत निस्तारण, पर्यावरणीय परियोजनाएं और विभागीय जवाबदेही।
तेजी से बढ़ते महानगरों की चुनौतियां भी लगातार बदल रही हैं। आबादी, यातायात, कचरा, जल प्रबंधन और बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ने के कारण नगर निकायों को परंपरागत कार्यशैली से आगे बढ़कर तकनीक, वित्तीय नवाचार और परिणाम आधारित प्रशासन अपनाना पड़ रहा है।
गाजियाबाद में किए गए प्रयोगों की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि स्थापित प्रणालियां कितनी स्थायी बनती हैं और नागरिकों को लंबे समय तक बेहतर सेवाएं देने में कितनी प्रभावी रहती हैं। फिर भी तीन वर्षों में आय, हरित वित्त, डिजिटल सेवाओं, स्वच्छता और फील्ड प्रशासन पर बढ़ा जोर शहर की शासन व्यवस्था में उल्लेखनीय परिवर्तन के रूप में देखा जा सकता है।
