कृत्रिम मिठास: कम कैलोरी का वादा, आंत–मस्तिष्क संकेतों पर नए सवाल

चीनी की खपत घटाने और रक्त शर्करा नियंत्रित रखने के उद्देश्य से कृत्रिम मिठास का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। हालांकि, उभरते शोध संकेत देते हैं कि इनका प्रभाव केवल कैलोरी तक सीमित नहीं रह सकता। कुछ स्वीटनर भूख, मस्तिष्क के रिवॉर्ड सिस्टम, आंत के सूक्ष्मजीवों और ग्लूकोज प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। सभी स्वीटनर और सभी व्यक्तियों पर इनका असर समान हो, इसके पर्याप्त प्रमाण अभी उपलब्ध नहीं हैं।

 

एक नियंत्रित अध्ययन में सुक्रालोज लेने के बाद मस्तिष्क के उस हिस्से में रक्त प्रवाह बढ़ा पाया गया, जो भूख नियंत्रित करता है। चीनी की तुलना में प्रतिभागियों ने अधिक भूख भी महसूस की। शोधकर्ताओं के अनुसार, मीठा स्वाद मिलने के बावजूद ऊर्जा नहीं मिलने से मस्तिष्क की भोजन-संबंधी प्रतिक्रिया प्रभावित हो सकती है। यह अध्ययन तात्कालिक प्रभावों पर केंद्रित था, इसलिए इससे दीर्घकालिक नुकसान सिद्ध नहीं होता।

 

आंत के माइक्रोबायोम पर हुए शोध में भी व्यक्ति-विशेष के अनुसार अलग परिणाम सामने आए हैं। एक परीक्षण में सैकरिन और सुक्रालोज ने कुछ प्रतिभागियों की ग्लूकोज प्रतिक्रिया तथा आंत के बैक्टीरिया की संरचना को प्रभावित किया, लेकिन यह असर प्रत्येक व्यक्ति में नहीं दिखा।

 

वजन घटाने का स्थायी समाधान नहीं

 

चीनी के स्थान पर कम या बिना कैलोरी वाला स्वीटनर अपनाने से शुरुआती दौर में कैलोरी घट सकती है। इसके बावजूद लंबे समय तक वजन नियंत्रित रखने में इनके लाभ को लेकर स्पष्ट सहमति नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वजन नियंत्रण के लिए गैर-शर्करा स्वीटनर पर निर्भर रहने की सलाह नहीं दी है। संगठन के अनुसार बेहतर रणनीति भोजन में कुल मिठास की आदत धीरे-धीरे कम करना है।

 

शुगर-फ्री या डाइट लेबल का अर्थ यह भी नहीं कि उत्पाद कैलोरी-मुक्त है। चॉकलेट, मिठाई और पेय में वसा, स्टार्च तथा अन्य कार्बोहाइड्रेट मौजूद हो सकते हैं। कई उत्पादों में माल्टोडेक्सट्रिन या डेक्सट्रोज जैसे घटक भी मिलाए जाते हैं, जो रक्त शर्करा को प्रभावित कर सकते हैं।

 

प्रमुख विकल्प और उनकी सीमाएं

  • एस्पार्टेम, सुक्रालोज, सैकरिन और एसेसल्फेम-पोटैशियम चीनी से सैकड़ों गुना अधिक मीठे होते हैं। स्वीकृत सीमा में इनके इस्तेमाल को नियामक संस्थाएं सुरक्षित मानती हैं, लेकिन भूख और माइक्रोबायोम पर इनके प्रभाव का अध्ययन जारी है।
  • जाइलिटोल, सॉर्बिटोल और माल्टिटोल जैसे शुगर अल्कोहल अधिक मात्रा में लेने पर गैस, पेट फूलने, ऐंठन या दस्त का कारण बन सकते हैं।
  • एरिथ्रिटोल और हृदय संबंधी जोखिम के बीच कुछ अध्ययनों में संबंध पाया गया है, लेकिन कारणपरिणाम अभी निर्णायक रूप से सिद्ध नहीं हुआ।
  • स्टीविया और मॉन्क फ्रूट पौधों से प्राप्त विकल्प हैं, लेकिन व्यावसायिक उत्पादों में इन्हें अक्सर एरिथ्रिटोल या अन्य स्वीटनर के साथ मिलाया जाता है।

 

कृत्रिम मिठास चीनी कम करने की संक्रमणकालीन रणनीति हो सकती है, पर यह असंतुलित भोजन, भावनात्मक खानपान, नींद की कमी या अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की आदत का समाधान नहीं है।