बंदरगाहों पर भीड़ से निर्यातकों की लागत बढ़ी, भंडारण शुल्क बना नई चुनौती
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण समुद्री व्यापार प्रभावित होने से भारतीय बंदरगाहों, विशेषकर पश्चिमी तट के प्रमुख पोर्ट्स पर भीड़ और परिचालन संबंधी दबाव बढ़ा है। इसके चलते निर्यातकों को माल भेजने में देरी के साथ अतिरिक्त भंडारण शुल्क का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (FIEO) ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप कर बंदरगाहों की भीड़ और शिपिंग कंपनियों द्वारा लगाए जा रहे अधिभार से राहत दिलाने की मांग की है।
भारत और पश्चिम एशिया को जोड़ने वाले मार्गों पर समुद्री मालभाड़ा करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ने की आशंका है। ड्रियूरी वर्ल्ड कंटेनर इंडेक्स के अनुसार, 40 फुट कंटेनर की औसत दर 4,374 डॉलर दर्ज की गई, जो इससे पहले 4,547 डॉलर थी। हालांकि, संघर्ष शुरू होने से पहले दर्ज 1,899 डॉलर की तुलना में यह स्तर करीब 130 प्रतिशत अधिक है।
लाल सागर में समुद्री नाकाबंदी और जहाजों के मार्ग में बदलाव के कारण अनेक पोत भारतीय बंदरगाहों पर ठहर रहे हैं। इससे कंटेनर उतारने का सामान्य समय 48 घंटे से बढ़कर लगभग 72 घंटे हो गया है और इन्वेंट्री का स्तर भी सामान्य से डेढ़ गुना तक पहुंच गया है। पश्चिमी तट के कुछ बंदरगाहों पर दबाव अधिक है, जबकि पूर्वी तट के बंदरगाहों की स्थिति अपेक्षाकृत सामान्य बनी हुई है।
भारत के 12 प्रमुख और 200 से अधिक गैर-प्रमुख बंदरगाह प्रतिवर्ष लगभग 1.6 करोड़ टीईयू कंटेनर यातायात संभालते हैं तथा करीब 8.6 ट्रिलियन डॉलर के समुद्री व्यापार को सुगम बनाते हैं। ऐसे में बंदरगाहों की परिचालन दक्षता बनाए रखना निर्यात प्रतिस्पर्धा, आपूर्ति शृंखला की स्थिरता और उद्योगों की लागत नियंत्रित रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
