पश्चिम यूपी की कमान, अब राज्यसभा में पहचान: राम प्रताप सिंह चौहान का बढ़ा सियासी कद

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय प्रभारी से राज्यसभा सांसद तक का सफर; दशकों के संगठनात्मक अनुभव और राजनीतिक सक्रियता के साथ राष्ट्रीय राजनीति में नई जिम्मेदारी।

 

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश के प्रदेश महामंत्री एवं पश्चिम उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय प्रभारी राम प्रताप सिंह चौहान को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने 5 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के आठ प्रत्याशियों की सूची जारी की, जिसमें चौहान का नाम भी शामिल है। लंबे संगठनात्मक अनुभव और पार्टी के प्रति समर्पण के बाद उन्हें राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया जाना उनके राजनीतिक जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

 

राम प्रताप सिंह चौहान की राज्यसभा उम्मीदवारी ऐसे समय में सामने आई है, जब वह पश्चिम उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के संगठन को मजबूत बनाने और विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को गति देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। अगस्त 2026 में भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने उन्हें पश्चिम उत्तर प्रदेश क्षेत्र का प्रभारी नियुक्त किया था। इसके बाद राज्यसभा के लिए उनका चयन संगठनात्मक स्तर पर उनके बढ़ते महत्व को दर्शाता है।

 

जमीनी कार्यकर्ता से प्रदेश नेतृत्व तक का सफर

 

राम प्रताप सिंह चौहान का राजनीतिक सफर भारतीय जनता पार्टी के जमीनी संगठन से शुरू हुआ। वर्ष 1991 में उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा में मंडल अध्यक्ष का दायित्व संभाला। इसके बाद युवा मोर्चा के महानगर उपाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। आगे चलकर उन्हें क्षेत्रीय और प्रदेश स्तर पर भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं।

 

आगरा के भाजपा जिलाध्यक्ष, ब्रज क्षेत्र महामंत्री और भाजपा के प्रदेश मंत्री जैसे पदों पर कार्य करते हुए उन्होंने संगठन के विभिन्न स्तरों का व्यापक अनुभव प्राप्त किया।

 

संगठनात्मक कार्यों के साथ चौहान को जनप्रतिनिधि के रूप में भी अनुभव है। वर्ष 2017 में वह आगरा जिले की एत्मादपुर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए और वर्ष 2022 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। इस कार्यकाल ने उनके राजनीतिक अनुभव में विधायी कार्यों और जनप्रतिनिधित्व का महत्वपूर्ण आयाम जोड़ा।

 

वर्ष 2023 में उन्हें उत्तर प्रदेश भाजपा का प्रदेश महामंत्री बनाया गया। जून 2026 में घोषित नई प्रदेश टीम में भी उन्हें यह दायित्व सौंपा गया। इसके बाद अगस्त 2026 में पश्चिम उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाए जाने से उनके संगठनात्मक कार्यक्षेत्र का और विस्तार हुआ।

 

राज्यसभा की उम्मीदवारी से बढ़ा राजनीतिक कद

 

भाजपा द्वारा राज्यसभा के लिए राम प्रताप सिंह चौहान को उम्मीदवार बनाए जाने को संगठन में लंबे समय से सक्रिय नेताओं को महत्व देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

 

उत्तर प्रदेश की दस राज्यसभा सीटों के लिए प्रस्तावित चुनाव के अंतर्गत भाजपा ने आठ उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। चौहान के साथ धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडे, प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार को भी उम्मीदवार बनाया गया है।

 

राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया में 7 अक्टूबर 2026 को नामांकन पत्रों की जांच के बाद भाजपा के सभी आठ और समाजवादी पार्टी के दो उम्मीदवारों के नामांकन वैध पाए गए। अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन निरस्त होने के कारण इन दस उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने की स्थिति बन गई है।

 

राज्यसभा के लिए चौहान का चयन संगठनात्मक नेतृत्व से राष्ट्रीय संसदीय राजनीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

पश्चिम उत्तर प्रदेश में मिशन-2027 पर विशेष जोर
पश्चिम उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी मिलने के बाद राम प्रताप सिंह चौहान ने मेरठ में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ संगठनात्मक तैयारियों की समीक्षा की।

 

पार्टी कार्यालय में आयोजित बैठक में उन्होंने बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने, आगामी कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने तथा केंद्र और प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया।

 

उन्होंने पश्चिम उत्तर प्रदेश को भाजपा का महत्वपूर्ण संगठनात्मक क्षेत्र बताते हुए कार्यकर्ताओं से विधानसभा चुनाव 2027 के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।

 

मेरठ आगमन पर जिलाध्यक्ष हरवीर पाल और महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तोगी के नेतृत्व में उनका स्वागत किया गया। बैठक में क्षेत्रीय एवं स्थानीय पदाधिकारियों की भी सहभागिता रही। संगठनात्मक चर्चा के दौरान चुनावी तैयारियां, कार्यकर्ताओं की सक्रियता, बूथ प्रबंधन और जनसंपर्क अभियान प्रमुख विषय रहे।

 

संगठन और संसदीय राजनीति में नई भूमिका की ओर

 

राम प्रताप सिंह चौहान को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाए जाने और पश्चिम उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपे जाने से यह स्पष्ट होता है कि भाजपा उनके लंबे संगठनात्मक अनुभव का उपयोग संगठन और संसदीय राजनीति, दोनों स्तरों पर करना चाहती है।

 

मंडल अध्यक्ष से लेकर प्रदेश महामंत्री और विधायक तक की जिम्मेदारियां निभा चुके चौहान के सामने पश्चिम उत्तर प्रदेश में स्थानीय इकाइयों तथा प्रदेश नेतृत्व के बीच समन्वय को प्रभावी बनाए रखने का महत्वपूर्ण दायित्व है।

 

उनकी राजनीतिक यात्रा जमीनी स्तर पर निरंतर संगठनात्मक कार्य, कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और नेतृत्व की जिम्मेदारियों के क्रमिक विस्तार का उदाहरण प्रस्तुत करती है।

 

राज्यसभा की उम्मीदवारी ने उनके राजनीतिक सफर में एक नया अध्याय जोड़ा है। इसके साथ ही पश्चिम उत्तर प्रदेश में संगठन की मजबूती और विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों में उनकी भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।